साँप की जीभ दो हिस्सों में क्यू होती है

 दुनिया में तरह-तरह के सांप हैं. सबकी अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं. लेकिन, एक चीज है जो सभी सांपों में समान देखी जाती है, वह है जीभ. सांपों की जीभ आगे से दो हिस्से में बंटी होती है. 



सांप की जीभ सदियों से वैज्ञानिकों के साथ लोगों के लिए चर्चा का विषय रही है, पर इसका एक धार्मिक कारण भी है. इस संबंध में हजारीबाग के सर्प मित्र मुरारी सिंह बताते हैं कि सांपों की जीव दो हिस्सों में बंटे होने के पीछे एक कथा मशहूर है. इसका वर्णन वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में मिलता है. कथा के अनुसार, महर्षि कश्यप की तेरह पत्नियां थी. इन 13 में से एक पत्नी का नाम कद्रू था और एक का नाम विनिता था.मान्यता है कि सभी सांपों को कद्रू ने ही जन्म दिया था. ये सभी कद्रू और महर्षि कश्यप के पुत्र-पुत्रियां थे. वहीं, पत्नी विनीता को महर्षि कश्यप से गरुड़ पुत्र प्राप्त हुआ था. एक बार जंगल में कद्रू और विनीता ने एक सफेद घोड़े को देखा, उस घोड़े दोनों का ही मनमोह लिया.इसके बाद दोनों के बीच बहस छिड़ गई कि घोड़े की पूंछ सफेद है या काली. बहस के बाद दोनों के बीच शर्त लग गई कि जिसकी बात सच होगी,


 वह इस शर्त जीत जाएगा. हारने वाली आजीवन दासी रहेगी. इसमें कुद्रा का कहना था कि घोड़े की पूंछ काले रंग की है, वहीं विनीता का कहना था कि घोड़े की पूंछ सफेद रंग की है.इसके बाद कद्रू ने अपने बच्चों को यह आज्ञा दी कि वह अपना रूप छोटा कर घोड़े की पूंछ में जाकर लिपट जाएं, ताकि दूर से या आभास हो कि घोड़े की पूंछ सफेद रंग के बजाय काले रंग की है. लेकिन, कद्रू के बच्चों ने ये काम करने के मना कर दिया, जिसके बाद कद्रू अपने बच्चों को भस्म होने का श्राप देने लगी. डर के मारे बच्चे घोड़े की पूंछ से लिपटने को तैयार हो गए। विनीता शर्त हार गई और शर्त के मुताबिक उसने दासी बनना स्वीकार कर लिया. यह बात जब विनीता के पुत्र गरुड़ को पता चली, तब वह अपने सर्प भाइयों के पास पहुंचा और माता को दासी से मुक्त करवाने की बात कही. उसके भाइयों ने शर्त रखी की अगर वह स्वर्ग से अमृत कलश लेकर आएगा तो उसकी माता को दासी से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके बाद गरुड़ स्वर्ग से अमृत कलश लेकर पृथ्वी पहुंच गया और उसे कुश के घास पर रख दिया. अपने भाइयों को कहा कि अमृत का सेवन करने से पहले वह जाकर तालाब में स्नान कर लें. इतनी देर में भगवान इंद्र अमृत का पीछा करते हुए पृथ्वी तक पहुंचे और अमृत का कलश उठाकर वापस स्वर्ग लौट गए. जब सारे सर्प तालाब में स्नान करके लौटे तो देखा कि कलश वहां पर नहीं है. जिस कारण उन्होंने कुश को यह समझ कर चाट लिया कि यहां पर अमृत की कुछ बूंदें अवश्य गिरी होंगी, जिससे उनकी जीभ दो हिस्सों में कट गई। सर्प मित्र मुरारी सिंह आगे बताते हैं कि इसके अलावा कई जीव वैज्ञानिकों का यह दावा है कि सर्प अपनी जीभ के एक हिस्से में गंध को जमा करते हैं और एक हिस्से का इस्तेमाल भोजन को नीचे ले जाने के लिए करते हैं. यह सांप को अन्य जीव से अलग बनाता है.


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