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अनन्त चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? अनन्त चतुर्दशी को केवल गणेश विसर्जन के दिन के रूप में देखना अधूरा है। इसका मूल धार्मिक संबंध भगवान विष्णु के “अनन्त” स्वरूप, अनन्त व्रत और 14 गांठ वाले अनन्त सूत्र से है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मनाया जाता है।

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  हाँ। अनन्त चतुर्दशी को केवल गणेश विसर्जन के दिन के रूप में देखना अधूरा है। इसका मूल धार्मिक संबंध भगवान विष्णु के “अनन्त” स्वरूप, अनन्त व्रत और 14 गांठ वाले अनन्त सूत्र से है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मनाया जाता है।  🕉️ अ नन्त चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? “अनन्त” का अर्थ है—जिसका न आदि है, न अंत। इस दिन भगवान विष्णु की अनन्त स्वरूप में पूजा की जाती है। श्रद्धालु सुख, शांति, समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना से अनन्त व्रत करते हैं और पूजा के बाद 14 गांठ वाला अनन्त सूत्र धारण करते हैं।  इसके पीछे सबसे प्रसिद्ध कथा ऋषि कौण्डिल्य और उनकी पत्नी सुशीला की है। 🌺 अनन्त चतुर्दशी की पूरी व्रत कथा बहुत प्राचीन समय की बात है। एक ब्राह्मण थे, जिनका नाम सुमन्त था। वे धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाले विद्वान व्यक्ति थे। उनकी एक पुत्री थी—सुशीला। जब सुशीला विवाह योग्य हुईं तो सुमन्त ने उनका विवाह कौण्डिल्य ऋषि के साथ कर दिया। विवाह के बाद सुशीला अपने पति कौण्डिल्य ऋषि के साथ उनके आश्रम की ओर चल पड़ीं। रास्ते में शाम हो गई। कौण्डिल्य ऋषि एक नदी के किनारे...